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शिर्डी में मेगा डिफेंस हब तैयार, सालाना 5 लाख गोले बनाने की क्षमता

May 23, 2026 Source: Public-Axis

शिर्डी में मेगा डिफेंस हब तैयार, सालाना 5 लाख गोले बनाने की क्षमता
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के शिर्डी में देश का एक बड़ा रक्षा विनिर्माण हब तेजी से विकसित किया जा रहा है, जिसे ‘शिर्डी डिफेंस कॉम्प्लेक्स’ कहा जा रहा है। यह परियोजना लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और इसे भारत के निजी क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा आर्टिलरी (तोप) गोला-बारूद उत्पादन केंद्र माना जा रहा है। इस डिफेंस हब का उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करना और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। इस परियोजना के तहत हर साल लगभग 5 लाख आर्टिलरी शेल (तोप के गोले) तैयार करने की क्षमता विकसित की जा रही है। इसके लिए दो आधुनिक असेंबली लाइनें स्थापित की जा रही हैं, जिनमें 155mm, 120mm, L-50 और 125mm जैसे विभिन्न प्रकार के गोले बनाए जाएंगे। इसके अलावा यहां मिसाइल सिस्टम, डिफेंस ड्रोन और रॉकेट लॉन्चर सिस्टम पर भी काम किया जा रहा है। हाल ही में सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के ट्रायल सफल रहे हैं, जिसके बाद इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। यह डिफेंस हब शिर्डी साईं मंदिर से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित बंजर भूमि पर विकसित किया जा रहा है, जो राज्य कृषि विकास निगम की जमीन है। यहां आधारभूत ढांचे का तेजी से निर्माण किया गया है, जिसमें सड़क नेटवर्क पूरा हो चुका है और 6 बड़े डोम बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रदर्शनी और डिफेंस टेक्नोलॉजी से जुड़े 100 से अधिक स्टॉल भी स्थापित किए जा रहे हैं, जहां सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी सरकारी और निजी कंपनियां अपनी तकनीक का प्रदर्शन करेंगी। इस परियोजना में लगभग 3000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की गई है, जिसे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ‘ग्लोब फोर्ज’ और निबे (NIBE) समूह द्वारा विकसित किया जा रहा है। यह पहल भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और सेना को स्वदेशी हथियारों एवं गोला-बारूद की तेज और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इस डिफेंस कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल भी मौजूद रहेंगे। सरकार और उद्योग जगत के अनुसार, यह परियोजना भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।