Thursday, May 28, 2026
English edition
PublicAxis PublicAxis

Balance. Truth. Perspective

India

प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित जिमखाना क्लब खाली कराएगी केंद्र सरकार

May 23, 2026 Source: Public-Axis

प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित जिमखाना क्लब खाली कराएगी केंद्र सरकार
केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित Delhi Gymkhana Club को खाली कराने का बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने क्लब प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए 5 जून 2026 तक परिसर खाली करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने क्लब को लगभग 15 दिनों का समय दिया है ताकि परिसर को खाली कर औपचारिक रूप से प्रशासन को सौंपा जा सके। सरकार के अनुसार, 2 सफदरजंग रोड स्थित करीब 27.3 एकड़ जमीन मूल रूप से सामाजिक और खेल गतिविधियों के लिए लीज पर दी गई थी। लेकिन अब यह इलाका राष्ट्रीय राजधानी के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में शामिल हो चुका है। केंद्र का कहना है कि इस जमीन की जरूरत रक्षा, प्रशासनिक बुनियादी ढांचे और सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं के विस्तार के लिए है। L&DO द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सरकार ने लीज समाप्त करने का निर्णय लेते हुए जमीन पर दोबारा कब्जा लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस क्षेत्र का उपयोग संस्थागत जरूरतों और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाएगा। चूंकि क्लब के आसपास प्रधानमंत्री आवास, कई केंद्रीय सरकारी कार्यालय और रक्षा प्रतिष्ठान मौजूद हैं, इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक अहमियत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास भी काफी पुराना और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1913 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के नाम से हुई थी। आजादी के बाद इसके नाम से ‘इंपीरियल’ शब्द हटा दिया गया। क्लब की मौजूदा इमारतें 1930 के दशक में तैयार की गई थीं और यह लुटियंस दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित इलाकों में गिना जाता है। सरकार के इस फैसले के बाद क्लब के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई लोग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक जरूरतों से जुड़ा जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि क्लब से जुड़े सदस्य और इतिहास प्रेमी इसके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित कर रहे हैं। फिलहाल सभी की नजरें 5 जून की समयसीमा और आगे की सरकारी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।