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NCP की रणनीतिक बैठक में विवाद, तटकरे-भुजबल के रिश्तों में खटास
May 28, 2026 Source: Public-Axis
मुंबई के देवगिरी बंगले में आयोजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की अहम बैठक के दौरान पार्टी के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए। यह बैठक राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, क्योंकि इसमें पार्टी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के साथ सांसद पार्थ पवार भी मौजूद थे। बैठक में विधानसभा और विधान परिषद के कई विधायक शामिल हुए, जहां आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर चर्चा की गई। लेकिन चर्चा के बीच ऐसा माहौल बना जिसने पार्टी के अंदर चल रही नाराजगी को भी उजागर कर दिया।
बैठक के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और वरिष्ठ नेता छगन भुजबल के बीच हुई तीखी नोकझोंक की रही। जानकारी के मुताबिक, सुनील तटकरे ने अपने संबोधन में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से उन पर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किल दौर में न तो पार्टी के विधायक खुलकर उनके समर्थन में आए और न ही पार्टी नेतृत्व ने उनका साथ दिया। तटकरे के इस बयान के बाद बैठक का माहौल अचानक गंभीर हो गया।
तटकरे की टिप्पणी पर वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने आपत्ति जताई। भुजबल का कहना था कि इस तरह के व्यक्तिगत और संगठनात्मक मुद्दों को सार्वजनिक रूप से बैठक में उठाना उचित नहीं है। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए। बैठक में मौजूद नेताओं के बीच इस बहस को लेकर काफी चर्चा होती रही और इससे पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को लेकर कई सवाल भी उठने लगे।
इसी बीच एक और घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी। बताया गया कि सुनील तटकरे के संबोधन से पहले ही सांसद पार्थ पवार बैठक से बाहर निकल गए। उनके अचानक बाहर जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, इस पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बैठक के अंत में पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है और इसी ताकत के दम पर पार्टी महाराष्ट्र में अपनी स्थिति और मजबूत करेगी। बैठक के दौरान सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें आगामी समय में सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी को पूरे महाराष्ट्र में मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया।
हालांकि बैठक का उद्देश्य संगठनात्मक मजबूती और आगामी रणनीति तय करना था, लेकिन नेताओं के बीच दिखी तल्खी ने यह संकेत जरूर दे दिया कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। आने वाले दिनों में इन मतभेदों का पार्टी की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।