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भावी सीएम शिवकुमार की संपत्ति जानकर रह जाएंगे हैरान, 1400 करोड़ का आंकड़ा
May 28, 2026 Source: Public-Axis
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ माना जा रहा है। इस राजनीतिक हलचल के बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया और सर्च इंजन पर लोग उनकी कुल संपत्ति और आर्थिक स्थिति को लेकर लगातार जानकारी खोज रहे हैं।
चुनावी हलफनामे के अनुसार डीके शिवकुमार देश के सबसे अमीर नेताओं में शामिल हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में दाखिल किए गए उनके एफिडेविट में उनकी कुल संपत्ति 1400 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी। वहीं उनके ऊपर लगभग 503 करोड़ रुपये का कर्ज भी दर्ज है। यह आंकड़े उनके और उनके परिवार की संयुक्त संपत्ति और देनदारियों के आधार पर सामने आए हैं।
हलफनामे के मुताबिक, डीके शिवकुमार और उनके परिवार के बैंक खातों में करीब 16 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि है। उनकी चल संपत्ति (movable assets) लगभग 244 करोड़ रुपये और परिवार सहित यह आंकड़ा 273 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। वहीं अचल संपत्ति (immovable assets) की बात करें तो यह लगभग 970 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि परिवार सहित यह 1140 करोड़ रुपये से अधिक है।
उनके निवेश पोर्टफोलियो में शेयर बाजार, रियल एस्टेट और कई व्यावसायिक प्रोजेक्ट शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने और उनके परिवार ने विभिन्न डेवलपर्स और कंपनियों में करोड़ों रुपये का निवेश किया हुआ है। इसके अलावा करीब 9 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी उनके नाम दर्ज है।
हलफनामे में यह भी बताया गया है कि डीके शिवकुमार के पास लग्जरी घड़ियों का संग्रह है, जिसमें Rolex और Hublot जैसे ब्रांड शामिल हैं। उनकी पत्नी और परिवार के पास मौजूद आभूषणों की कीमत लगभग 3.28 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
रियल एस्टेट सेक्टर में भी उनकी मजबूत पकड़ दिखाई देती है। उनके और परिवार के नाम पर लगभग 30 करोड़ रुपये की कृषि भूमि दर्ज है। इसके अलावा कई फ्लैट और घर हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 84 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक करीब 900 करोड़ रुपये मूल्य का ग्लोबल मॉल भी शामिल है, जो उनकी व्यावसायिक हिस्सेदारी को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, डीके शिवकुमार की संपत्ति उनके व्यापक बिजनेस नेटवर्क, रियल एस्टेट निवेश और वित्तीय हिस्सेदारी को दर्शाती है। हालांकि उनके ऊपर बड़ा कर्ज भी है, लेकिन इसके बावजूद उनकी गिनती भारत के सबसे संपन्न राजनीतिक नेताओं में होती है।