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कर्नाटक हाईकोर्ट ने कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल, दी सख्त राय ....

June 2, 2026 Source: Public-Axis

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल, दी सख्त राय ....
बेंगलुरु। कर्नाटक हाईकोर्ट ने बढ़ते अपराधों और अपराधियों में कानून के प्रति कम होते भय को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि मौजूदा व्यवस्था में अपराधियों के खिलाफ पर्याप्त सख्ती नहीं होने के कारण अपराध करना आसान होता जा रहा है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कुछ मध्य-पूर्वी देशों में लागू कठोर दंड व्यवस्था अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखने में मदद करती है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति आर. नटराज ने एक रेप आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि आज के समय में अपराधियों के मन से कानून का डर लगभग समाप्त हो चुका है। यदि अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए जाएंगे तो अपराधों पर अंकुश लगाना मुश्किल होगा। न्यायाधीश ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और कई लोग इसी कारण कानून को हल्के में लेने लगते हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कानून का वास्तविक उद्देश्य केवल सजा देना नहीं बल्कि अपराध को रोकना भी है। लेकिन जब अपराधियों को सख्त दंड नहीं मिलता तो कानून का निवारक प्रभाव कमजोर पड़ जाता है। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ देशों में कठोर दंड व्यवस्था के कारण लोग अपराध करने से पहले कई बार सोचते हैं। मामला मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), मणिपाल के छात्र गोपी रेड्डी कार्तिक रेड्डी से जुड़ा है। आरोपी छात्र 5 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में है। उस पर अपनी सहपाठी के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन शोषण करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता और आरोपी पहले एक-दूसरे के साथ रिश्ते में थे। बाद में युवती ने आरोपी के व्यवहार और चरित्र पर संदेह होने के कारण उससे दूरी बना ली थी। युवती का आरोप है कि संबंध समाप्त होने के बाद भी आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती की। इसी मामले में आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 8 जून तक के लिए स्थगित कर दी है। फिलहाल अदालत ने जमानत पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। हालांकि सुनवाई के दौरान अपराधों की बढ़ती घटनाओं और कानून के कमजोर पड़ते प्रभाव को लेकर की गई न्यायालय की टिप्पणियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। अदालत ने संकेत दिया कि अपराध रोकने के लिए केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी और सख्त क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है।