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स्वास्थ्य का हवाला देकर मंत्री पद छोड़ा, समर्थकों ने दबाव की ओर किया इशारा ...

June 2, 2026 Source: Public-Axis

स्वास्थ्य का हवाला देकर मंत्री पद छोड़ा, समर्थकों ने दबाव की ओर किया इशारा ...
बांग्लादेश में सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार को अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में ही एक बड़ा झटका लगा है। सरकार में शामिल एकमात्र बौद्ध मंत्री दीपेन दीवान चकमा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने चटगांव हिल ट्रैक्ट्स मामलों के मंत्री के रूप में लगभग तीन महीने तक जिम्मेदारी संभालने के बाद पद छोड़ने का फैसला लिया। दीपेन दीवान चकमा ने अपने इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भेजे गए त्यागपत्र में कहा कि उनकी शारीरिक स्थिति उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने से रोक रही है। उनका मानना है कि उनकी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण सरकारी कार्यों और विकास परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्होंने पद छोड़ना उचित समझा। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस इस्तीफे की पुष्टि कर दी गई है। प्रधानमंत्री के अतिरिक्त प्रेस सचिव अतीकुर रहमान रुमोन ने बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने दीपेन दीवान चकमा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हालांकि, मंत्री के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दीपेन दीवान चकमा के समर्थक उनके द्वारा बताए गए स्वास्थ्य कारणों से सहमत नहीं हैं। उनका दावा है कि मंत्री ने किसी प्रकार के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के चलते इस्तीफा दिया है। समर्थकों का कहना है कि केवल तीन महीने के भीतर मंत्री पद छोड़ना कई सवाल खड़े करता है और इसके पीछे वास्तविक कारणों की जांच होनी चाहिए। गौरतलब है कि हाल ही में हुए चुनावों में BNP की बड़ी जीत के बाद सरकार में अल्पसंख्यक समुदायों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया था। इसी क्रम में हिंदू समुदाय से निताई रॉय चौधरी और बौद्ध समुदाय से दीपेन दीवान चकमा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। दीपेन दीवान चकमा का इस्तीफा सरकार में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर भी नई बहस को जन्म दे सकता है। दीपेन दीवान चकमा का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। वह वर्ष 2005 में वरिष्ठ संयुक्त जिला न्यायाधीश के पद से इस्तीफा देकर BNP में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने पार्टी में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं और हाल ही में मंत्री पद तक पहुंचे। अब उनके अचानक इस्तीफे ने बांग्लादेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।