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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा यू-टर्न नहीं, राहत भरा फैसला; नहीं होगी रकम की वसूली ...

June 2, 2026 Source: Public-Axis

महाराष्ट्र सरकार का बड़ा यू-टर्न नहीं, राहत भरा फैसला; नहीं होगी रकम की वसूली ...
महाराष्ट्र सरकार की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा चल रही है। योजना के लाभार्थियों की जांच के बाद करीब 80 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा था कि उनके खातों में पहले से जमा की गई सहायता राशि वापस ली जाएगी या नहीं। अब इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि जिन महिलाओं को अपात्र पाया गया है, उनसे पहले दी गई राशि की कोई वसूली नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने विभिन्न सरकारी डेटाबेस के माध्यम से लाभार्थियों का सत्यापन किया, जिसके दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। हालांकि महिलाओं को राहत देते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि उनसे किसी प्रकार की रिकवरी नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी खुलासा किया कि जांच के दौरान लगभग 14 हजार ऐसे पुरुषों की पहचान हुई है जिन्होंने महिलाओं के नाम पर आवेदन कर योजना का लाभ प्राप्त किया। सरकार ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि इन पुरुषों से प्राप्त की गई पूरी राशि की वसूली की जाएगी। विपक्ष लगातार सरकार से यह सवाल पूछ रहा था कि अपात्र घोषित लाभार्थियों के खातों में जमा धनराशि का क्या होगा। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है और जनता के पैसे का उपयोग नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। फडणवीस ने आगे बताया कि सत्यापन प्रक्रिया में करीब 5 लाख सरकारी कर्मचारी, 10 लाख आयकरदाता महिलाएं और लगभग 5 लाख चारपहिया वाहन रखने वाली महिलाएं भी योजना के लिए अयोग्य पाई गई हैं। सरकार अब पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने कहा कि ई-केवाईसी केवल लाडकी बहीण योजना के लिए नहीं, बल्कि सभी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं के लिए अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को ई-केवाईसी पूरा करने के लिए आठ से दस महीने का पर्याप्त समय दिया गया था। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर ई-केवाईसी प्रक्रिया के लिए एक और अवसर दिया जा सकता है, ताकि पात्र महिलाएं योजना का लाभ प्राप्त करने से वंचित न रहें।