Thursday, July 16, 2026
English edition
PublicAxis PublicAxis

Balance. Truth. Perspective

India

G7 में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन, पीएम मोदी ने चुने अनोखे तोहफे...

June 20, 2026 Source: Public-Axis

G7 में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन, पीएम मोदी ने चुने अनोखे तोहफे...
G7 में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन, पीएम मोदी ने चुने अनोखे तोहफे...
G7 में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन, पीएम मोदी ने चुने अनोखे तोहफे...
G7 में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन, पीएम मोदी ने चुने अनोखे तोहफे...
G7 में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन, पीएम मोदी ने चुने अनोखे तोहफे...
G7 में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन, पीएम मोदी ने चुने अनोखे तोहफे...

1 / 6

फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों के नेताओं को भारत की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े खास उपहार भेंट किए। इन उपहारों के माध्यम से उन्होंने भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, स्थानीय उत्पादों और टिकाऊ खेती की झलक दुनिया के सामने प्रस्तुत की। पीएम मोदी द्वारा दिए गए उपहारों में जम्मू-कश्मीर का प्रसिद्ध रामबन शहद, मेघालय की GI टैग वाली लाकाडोंग हल्दी, राजस्थान के नागौर जिले की औषधीय गुणों से भरपूर नागौरी अश्वगंधा और वाराणसी के कारीगरों द्वारा तैयार किया गया बनारसी सिल्क स्टोल शामिल थे। ये सभी उत्पाद भारत की विविध संस्कृति और सदियों पुरानी कारीगरी का प्रतीक हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के संसद अध्यक्ष रिचर्ड राई को बिहार और झारखंड की पारंपरिक मिठाई ‘ठेकुआ’ भेंट की। छठ पर्व से जुड़ी यह मिठाई पूर्वी भारत की समृद्ध खान-पान संस्कृति और लोक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है। G7 शिखर सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन समेत कई प्रमुख वैश्विक नेता शामिल हुए। सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बैठकों को बेहद उपयोगी बताया और कहा कि भारत ने वैश्विक विकास, सुशासन और ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में नैतिक और मानव-केंद्रित विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि नई तकनीकों का लाभ विकासशील देशों तक भी पहुंच सके।