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MEA के बयान के बाद विपक्ष का हमला, नागरिकता प्रमाण पर छिड़ी बहस

June 25, 2026 Source: Public-Axis

MEA के बयान के बाद विपक्ष का हमला, नागरिकता प्रमाण पर छिड़ी बहस
विदेश मंत्रालय (MEA) के एक हालिया बयान के बाद नागरिकता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सवालों की बौछार कर दी। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि यदि पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो आखिर कौन-सा दस्तावेज नागरिकता साबित करने के लिए मान्य माना जाएगा। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह किया जाए, तो उसे मतदान के अधिकार से भी वंचित किया जा सकता है। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। वहीं शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाया कि पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस और अन्य एजेंसियां जो विस्तृत सत्यापन करती हैं, उसका उद्देश्य क्या है। उन्होंने पूछा कि क्या भारत गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी करता है। कांग्रेस की केरल इकाई ने भी सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा कर सरकार की आलोचना की। विपक्ष का कहना है कि जब पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, तो उसे नागरिकता के प्रमाण के रूप में पूरी तरह खारिज करना भ्रम पैदा कर सकता है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेश में भारतीय नागरिक की राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए जारी किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, ई-पासपोर्ट में बायोमेट्रिक और सुरक्षा संबंधी आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके और वैश्विक स्तर पर इसकी विश्वसनीयता बढ़े।