Thursday, July 16, 2026
English edition
PublicAxis PublicAxis

Balance. Truth. Perspective

India

नई NCERT पुस्तक में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के भेदभाव पर जोर

July 8, 2026 Source: Public-Axis

नई NCERT पुस्तक में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के भेदभाव पर जोर
नई NCERT पुस्तक में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के भेदभाव पर जोर

1 / 2

NCERT ने कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान (भाग-2) की पुस्तक *‘Exploring Society: India and Beyond’* में भेदभाव (Discrimination) की परिभाषा का दायरा पहले से अधिक व्यापक कर दिया है। अब जाति, धर्म, नस्ल, लिंग और दिव्यांगता के साथ-साथ **आर्थिक स्थिति (Economic Background)** को भी भेदभाव का एक महत्वपूर्ण आधार माना गया है। यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद तैयार किए गए नए पाठ्यक्रम का हिस्सा है। पुस्तक के **‘नागरिकता: अधिकार और कर्तव्य’** अध्याय में बताया गया है कि किसी व्यक्ति या समूह के साथ उसकी जाति, धर्म, नस्ल, जातीय पहचान, शारीरिक बनावट, दिव्यांगता, लिंग, यौन पहचान या आर्थिक स्थिति के आधार पर अलग या अनुचित व्यवहार करना भेदभाव की श्रेणी में आता है। किताब में स्पष्ट किया गया है कि ऐसा व्यवहार केवल नैतिक रूप से गलत नहीं है, बल्कि भारतीय कानून के भी खिलाफ है। नई पुस्तक में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अक्सर शिक्षा और समाज में असमान व्यवहार का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से आर्थिक स्थिति को भी भेदभाव के प्रमुख आधारों में शामिल किया गया है, ताकि विद्यार्थियों में समानता और संवेदनशीलता की समझ विकसित हो सके। यह बदलाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में जारी **UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026** में भेदभाव के कई आधारों का उल्लेख किया गया है, लेकिन आर्थिक स्थिति को अलग से शामिल नहीं किया गया। इस मुद्दे पर कई शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए थे और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के साथ होने वाले भेदभाव को स्पष्ट मान्यता देने की मांग की थी। इससे पहले NCERT ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों में भी बदलाव करते हुए **मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)** और **भारत के चुनाव आयोग** की भूमिका पर नया अध्याय जोड़ा था। इसमें चुनाव आयोग की निष्पक्ष चुनाव कराने, मतदाता सूची तैयार करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में निभाई जाने वाली जिम्मेदारियों को विस्तार से समझाया गया है।