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मुर्गी पालन से महिलाओं को रोजगार और आय, दंतेवाड़ा में सफल हो रही बिहान की पहल

September 8, 2026 Source: Public-Axis

मुर्गी पालन से महिलाओं को रोजगार और आय, दंतेवाड़ा में सफल हो रही बिहान की पहल
मुर्गी पालन से महिलाओं को रोजगार और आय, दंतेवाड़ा में सफल हो रही बिहान की पहल

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रायपुर, 08 सितंबर 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (‘बिहान’) के तहत संचालित इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर योजना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक प्रभावी जरिया बन रही है। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा और दंतेवाड़ा विकासखंडों में बीते डेढ़ वर्षों से लागू इस योजना के जरिए लगभग 2,200 परिवारों को आजीविका के नए साधनों से जोड़ा जा चुका है। *हिम्मत और मेहनत की मिसाल बनीं रामबती* दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड के ग्राम मुड़ापारा की निवासी रामबती नाग ने इस योजना का लाभ उठाकर मुर्गी पालन की शुरुआत की। जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें जून माह में ₹80 प्रति चूजा की दर से 100 चूजे और दाना उपलब्ध कराया गया था। शुरुआती दौर में बीमारी के कारण करीब 25 से 30 चूजों की मृत्यु हो जाने से रामबती को झटका ज़रूर लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बचे हुए चूजों का बेहतर रखरखाव और देखभाल करके उन्होंने अब तक करीब ₹25,000 की शुद्ध आय अर्जित कर ली है। रामबती अपने तैयार मुर्गों को ₹500 प्रति किलो की दर से बेचती हैं, जिनका औसतन वजन 1 से 3 किलोग्राम तक होता है। *ब्रुडिंग केंद्रों से महिला उद्यमियों को दोहरा लाभ* योजना के अंतर्गत एक विशेष पहल भी शुरू की गई है, जिसमें क्लस्टर स्तर पर महिलाओं को उद्यमी के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये महिला उद्यमी बाहर से क्रॉस असील प्रजाति के ज़ीरो-डे चूजे लाती हैं और ब्रुडिंग केंद्र में 15 दिनों तक उनका पालन-पोषण करती हैं। इसके बाद इन स्वस्थ चूजों को समूह की अन्य महिलाओं को सौंपा जाता है, जिससे तैयार करने वाली उद्यमी और पालन करने वाली महिला, दोनों को आय का अवसर मिल रहा है। *450 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार* जिले के विभिन्न क्लस्टरों में अब तक लगभग 450 महिलाओं को मुर्गी पालन गतिविधि से जोड़ा गया है। महिलाओं को उनकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार 50 से 100 चूजे मुहैया कराए जाते हैं। बिहान योजना की इस पहल ने न केवल स्थानीय स्तर पर नियमित रोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि रामबती जैसी सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास भरकर उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर खड़ा किया है।