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हार के बाद भी कुर्सी न छोड़ने पर ममता बनर्जी निशाने पर, जेठमलानी का कड़ा बयान

May 6, 2026 Source: Public-Axis

हार के बाद भी कुर्सी न छोड़ने पर ममता बनर्जी निशाने पर, जेठमलानी का कड़ा बयान
Mamata Banerjee के इस्तीफा न देने को लेकर वरिष्ठ वकील Mahesh Jethmalani ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिससे West Bengal की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार करने पर उन्होंने इसे संविधान और लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बताया है। महेश जेठमलानी ने कहा कि चुनाव में जनादेश खोने के बाद किसी भी मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना “अवैध कब्जा” माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि ममता बनर्जी स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल को संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें पद से हटाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर राज्यपाल पुलिस बल की मदद से कार्रवाई कर सकते हैं। Supreme Court of India के वरिष्ठ वकील जेठमलानी ने ममता बनर्जी के “मोरल विक्ट्री” और “साजिश” जैसे दावों को भी खारिज कर दिया। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हार को स्वीकार करना ही सही परंपरा है, और हार के बाद पद पर बने रहना संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है। राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा और भी गरमा गया है। Bharatiya Janata Party (भाजपा) के नेताओं ने ममता बनर्जी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग शुरू कर दी है, जबकि All India Trinamool Congress (टीएमसी) इस पूरे विवाद को “बदले की राजनीति” बता रही है। जेठमलानी ने चेतावनी दी कि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। इसके बाद यदि ममता बनर्जी पद पर बनी रहती हैं, तो उनकी हर गतिविधि को गैरकानूनी माना जा सकता है और उनके खिलाफ ‘अनाधिकृत प्रवेश’ (ट्रेसपासिंग) का मामला भी बन सकता है। कुल मिलाकर, यह विवाद अब केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक बहस का रूप ले चुका है, जिसमें राज्यपाल की भूमिका और लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन केंद्र में आ गया है।